लिंगोत्थान की गड़बड़ी: पुरुषों को जिन बातों का पता होना चाहिए और इसके इलाज के तरीके

दिल की बढ़ती धड़कनों और शरीरों में होने वाली तेज हरकतों की वजह से, सेक्स एक काफी गहन गतिविधि की तरह लग सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि सेक्स वास्तव में एक ऐसी गतिविधि है जिसमें मानव शरीर के लिए कई फायदे छुपे हैं; जिनमें तनाव के लक्षणों में कमी भी शामिल है।

लिंग शारीरिक व्यायाम का भी एक रूप है और दिल के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है एवं निश्चित रूप से आपके और आपकी संगिनी के बीच एक मजबूत बंधन बनाए रखने में मदद करता है। सेक्स के दौरान दोनों भागीदारों के शरीर कई रासायनिक प्रतिक्रियाओं, तंत्रिका जनित आवेगों, और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से गुजरते हैं।

अगर इन प्रक्रियाओं में कुछ गड़बड़ी हो जाए, तो कुछ मामलों में सेक्स सुखद नहीं भी हो सकता है।

एक विशेष परेशानी जिससे पुरुष लोग अक्सर पीड़ित हो जाते हैं वह है लिंगोत्थान संबंधी गड़बड़ी। यह एक ऐसी बीमारी है जो भेदन को अल्पकालिक या कुछ मामलों में, पूरी तरह असंभव ही बना देती है।

इस मार्गदर्शिका में हम लिंगोत्थान की गड़बड़ी के बारे में बात करेंगे, जिसमें इस रोग की वास्तविकता, इसके कारणों और लक्षणों के अलावा हम इसके निदान के तरीकों और इससे पीड़ित पुरुषों के लिए संभावित उपायों के बारे में भी चर्चा करेंगे।

हम उन विभिन्न उपचारों पर भी नज़र डालेंगे जिनके माध्यम से इस स्थिति की गंभीरता को कम करने और बेडरूम में अधिक शक्तिशाली लिंगोत्थान को फिर से प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

लिंगोत्थान की गड़बड़ी क्या है?

आइए शुरू में हम लिंगोत्थान की गड़बड़ी की वास्तविकता को जान लें, और फिर एक सरसरी निगाह पुरुषों के जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों और इससे पीड़ित पुरुषों कि संख्या पर भी डालेंगे। लिंगोत्थान की गड़बड़ी

आइए शुरू में हम लिंगोत्थान की गड़बड़ी की वास्तविकता को जान लें, और फिर एक सरसरी निगाह पुरुषों के जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों और इससे पीड़ित पुरुषों कि संख्या पर भी डालेंगे। लिंगोत्थान की गड़बड़ी, जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, एक विकार है जो एक पुरुष के लिंगोत्थान संबंधी समस्याओं का कारण बनता है – अर्थात् वह एक सामान्य और कठोर लिंगोत्थान प्राप्त करने में अक्षम हो जाता है।

लिंगोत्थान की गड़बड़ी हो जाने के बाद भी एक पुरुष लिंगोत्थान को प्राप्त करने में सक्षम हो सकता है, जो कभी-कभी कठोर भी हो सकता है, लेकिन यौन गतिविधि के दौरान वह बहुत जल्द ढीला पड़ जा सकता है; जिससे पुरुष एवं उसकी संगिनी के पूरी तरह से संतुष्ट होने से पहले ही संभोग समाप्त हो जाता है।

यह एक मध्यम प्रकार का लिंगोत्थान दोष है क्योंकि पुरुष अभी भी यौन उत्तेजना को प्राप्त करने सक्षम है। जब लिंगोत्थान संबंधी गड़बड़ी अधिक गंभीर हो जाती है, तो फिर वह पुरुष एक लिंगोत्थान प्राप्त करने में भी अक्षम हो जा सकता है।

लिंगोत्थान की गड़बड़ी के निदान के तरीकों और लक्षणों पर विचार करने की बात आती है; सबसे पहले यह जानना महत्वपूर्ण है कि यौन विकार से जुड़े लक्षण अगर कभी-कभी ही प्रकट होते हों तो इसे सामान्य माना जाता है।

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जब एक पुरुष अपने जीवन में तनावपूर्ण घटनाओं का सामना करता है; तो वह ऐसे लिंगोत्थान को पाने में असमर्थ हो सकता है जो सेक्स के लिए पर्याप्त रूप से दृढ़ हो, या फिर वह तनाव के कारण सेक्स करने के लिए पर्याप्त समय तक अपना लिंगोत्थान बनाए रखने में भी असमर्थ हो सकता है।

जब यह समस्या अक्सर होने लगती है, तो फिर उस पुरुष का लिंगोत्थान दोष चिकित्सकीय रूप से निदान किए जाने वाले स्तर पर पहुँच चूका होता है।

लिंगोत्थान दोष के लिए नैदानिक अध्ययन

Boston University School of Medicine की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 40 से 70 वर्ष की उम्र के भीतर आने वाले सभी पुरुषों में से कम से कम 10% लोग लिंगोत्थान संबंधी गंभीर गड़बड़ियों का अनुभव करते हैं, जिनमें से कई पुरुष एक लिंगोत्थान प्राप्त करने में पूरी तरह से असमर्थ हो जाते हैं ।

इसी आयु वर्ग के पुरुषों में एक अतिरिक्त 25% लोग लिंगोत्थान की मध्यम स्तर की गड़बड़ियों का अनुभव करते हैं – अर्थात् वे अभी भी एक लिंगोत्थान प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं। लेकिन उनका लिंगोत्थान या तो यौन संभोग के लिए पर्याप्त रूप से दृढ़ नहीं होता या फिर दोनों भागीदारों के कामोन्माद को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय तक टिक नहीं पाता।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह विकार बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है, जिसमें 70 वर्ष के आयु वर्ग के 49% पुरुष कठोर लिंगोत्थान प्राप्त करने में बिलकुल असमर्थ हो जाते हैं।

लिंगोत्थान दोष के सबसे आम लक्षण क्या हैं?

इसका सबसे आम लक्षण पुरुष को यह पता चल जाना है कि वह अब यौन उत्तेजन के दौरान एक लिंगोत्थान प्राप्त करने में असमर्थ हो चूका है। यह उसके लिए शर्मनाक होने के साथ ही उसके आत्म-सम्मान को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। दुर्भाग्यवश, यह समस्या पहली बार प्रकट होने पर कुछ पुरुष पुरी तरह से घबरा जाते हैं और तुरंत सबसे खराब संभावनाओं को ही घटित मान लेते हैं।

इस कारण से, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कठोर लिंगोत्थान हासिल करने या लिंगोत्थान को बनाए रखने में कभी कभी सक्षम नहीं हो पाना अपेक्षाकृत सामान्य है। जब यह समस्या लगातार बनी रहे, तो इसे चिंता का कारण समझना चाहिए।

इस प्रकार, यदि कोई पुरुष एक लिंगोत्थान प्राप्त करने या अपने लिंगोत्थान को बनाए रखने में असमर्थ है, या कुछ मामलों में, संभोग के लिए एक पर्याप्त रूप से कठोर लिंगोत्थान प्राप्त करने में सक्षम नहीं है, तो ऐसा जब एक विस्तृत अवधि तक होता हुआ दिखे – जैसे यदि यह समस्या यौन गतिविधियों के दौरान एक महीने तक हर बार पैदा होती हो – तो फिर उसे इस समस्या की जांच कराने के लिए एक डॉक्टर से मिल लेना चाहिए।

उदाहरण के लिए, यदि पुरुष एक महीने या हर दूसरे महीने में केवल एक बार ही इन लक्षणों का अनुभव करता है, तो यह केवल तनावपूर्ण दिनों के कारण हो सकता है। फिर भी, किसी डॉक्टर से एक सामान्य जांच करा लेने में कोई हर्ज नहीं!

लिंगोत्थान दोष के मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या हैं?

एक पुरुष पर पड़ने वाले लिंगोत्थान दोष के प्रभावों के बारे में अक्सर शारीरिक धरातल पर ही विचार किया जाता है, और लोग अक्सर इस तथ्य पर विचार करना भूल जाते हैं कि यह विशेष विकार प्रभावित व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के परे की (मनोवैज्ञानिक) समस्याओं का भी कारण बन सकता है।

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Urology Health के मुताबिक, जिन लोगों को – या तो किसी डॉक्टर द्वारा या केवल प्रकट होने वाले लक्षणों के आधार पर -लिंगोत्थान दोष होने का निदान किया जाता है, वे कई प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभावों के भी शिकार हो जाते हैं। उनके आत्म-सम्मान पर अक्सर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

उनमें बेडरूम में अपने प्रदर्शन के बारे में भी चिंता पैदा हो सकती है, जिसका मतलब है कि किसी के साथ यौन गतिविधि में शामिल होते समय वे घबराहट महसूस करेंगे, क्योंकि उन्हें पता नहीं होगा कि उनके उक्त दोषों के कारण वे संभोग में सक्षम होंगे भी या नहीं।

यह रोग प्रभावित व्यक्ति के जीवन में तनाव को बढ़ा देता है और अक्सर उसे अवसाद की गहरी खाई में जा गिराता है।

लिंगोत्थान दोष के ये प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव वापस लिंगोत्थान को ही बुरी तरह से प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, संभोग शुरू करते समय यदि पुरुष अपने प्रदर्शन के बारे में चिंतित हो, तो इससे उसकी वे समस्याएं “अन्दर ही अन्दर” और भी खराब हो जाएंगी।

अवसाद को लिंगोत्थान की गड़बड़ी के कारण के रूप में भी देखा जाता है, जिसका मतलब है कि लिंगोत्थान की गड़बड़ी के कारण अवसाद पैदा होने से, वापस वही अवसाद फिर लिंगोत्थान को और भी बदतर बनाने का कारण बन जाएगा।

लिंगोत्थान दोष के कारण क्या हैं?

लिंगोत्थान दोष एक विकार है जो अधिकांश मामलों में अंतर्निहित कारणों से विकसित होता है। बढ़ती उम्र इस समस्या के कारकों में सबसे महत्वपूर्ण है। हम अपनी बढ़ती उम्र के साथ लिंगोत्थान की गड़बड़ियों को भी बढ़ते हुए देख सकते हैं।

एंड्रोपॉज (Andropause), जिसका मतलब है शरीर के अन्दर बहने वाले टेस्टोस्टेरोन की मात्रा में कमी, एक उम्र के साथ जुड़ी समस्या होने से ऐसा लगता है कि यह स्थिति एंड्रोपॉज से संबंधित है।

हालांकि, हकीकत में टेस्टोस्टेरोन की कमी की वजह से पैदा होने वाली लिंगोत्थान की समस्या से काफी कम लोग पीड़ित होते हैं। ज्यादातर मामलों में, यह विकार किसी अन्य अंतर्निहित चिकित्सकीय समस्या के कारण पैदा होता है।

The National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases ने बताया है कि कई अंतर्निहित बीमारियां लिंगोत्थान संबंधी गड़बड़ियों के लक्षणों का कारण बन सकती हैं। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, बहुविध ऊत्तक दृढ़न (Multiple Sclerosis), गुर्दे की बीमारियां और लिंग के टेढ़ेपन की बीमारी (Peyronie’s disease) जैसी रक्त वाहिकाओं और हृदय को प्रभावित करने वाली बीमारियाँ शामिल हैं।

यदि किसी पुरुष का लिंग, प्रोस्टेट, श्रोणि, रीढ़ की हड्डी या मूत्राशय किसी कारण से घायल हो चुका है, तो इससे भी लिंगोत्थान की गड़बड़ी पैदा हो सकती है, और प्रोस्टेट कैंसर से निपटने के लिए दिए गए उपचार से पहुंचे चोट के कारण भी पुरुष के लिंगोत्थान की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

इनके अलावा, कुछ जीवनशैली संबंधी कारक भी लिंगोत्थान दोष के विकास में योगदान देते हैं। इस विकार के संबंध में शराब और नशीली दवाओं के साथ-साथ तम्बाकू उत्पादों का सेवन भी खतरनाक हो सकता है।

हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मानसिक बीमारियां, जैसे अवसाद, जैसा कि हम पहले ही उल्लेख कर चुके हैं, पुरुष के लिंगोत्थान प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है क्योंकि लिंगोत्थान की प्रक्रिया का सूत्रपात अनिवार्य रूप से मस्तिष्क के अन्दर ही होता है।

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लिंगोत्थान दोष का इलाज कैसे किया जाता है?

हम सभी ने वियाग्रा के बारे में सुना है, जो लिंगोत्थान संबंधी बीमारी के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे लोकप्रिय दवा है। इस दवा में सिल्डेनाफिल (Sildenafil) नामक एक रसायन होता है, जो लिंग की ओर बहने बाले खून की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। खून के बहाव का स्तर पूरी तरह से खुराक की क्षमता के स्तर पर निर्भर करता है, जो 25 मिलीग्राम से लेकर 100 मिलीग्राम तक हो सकता है।

DrEd.com ने बताया है कि आम तौर पर वियाग्रा को काम करने में 30 मिनट लगते हैं और फिर उपयोगकर्ता को यौन उत्तेजन के बदौलत एक अदद लिंगोत्थान प्राप्त होता है। जबकि वियाग्रा लिंगोत्थान के लिए पुरुषों का सबसे लोकप्रिय उपचार है, यह निश्चित रूप से सबसे सुरक्षित विकल्प नहीं है।

वियाग्रा लेने पर, पुरुषों को कई दुष्प्रभावों[6] का अनुभव हो सकता है, जैसे पीठ दर्द, नाक बंद होना, विकृत दृष्टि, पेट की गड़बड़ी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, मिचली आदि।

वियाग्रा के कई विकल्प हैं जो लिंगोत्थान प्राप्त करने में एक पुरुष की सहायता तो करते हैं, लेकिन इन दवाओं से विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

सौभाग्य से, लिंगोत्थान दोष के इलाज के अन्य तरीके मौजूद हैं। चूंकि एक अंतर्निहित चिकित्सकीय गड़बड़ी अक्सर ऐसी स्थिति का कारण बनती है, अतः एक अनुभवी डॉक्टर पुरुष रोगी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के विश्लेषण के माध्यम से इसका इलाज शुरू करेगा।

इससे उन्हें यह निर्धारित करने में मदद मिलती है कि समस्या का कारण क्या हो सकता है और फिर वे उस स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ी का समाधान कर सकते हैं जो लिंगोत्थान में बाधक साबित हो रही होती है।

उदाहरण के लिए, अगर अवसाद के कारण पुरुष को इन लक्षणों का अनुभव हो रहा है, तो मानसिक बीमारी का उपचार लेने से उसे मदद मिल सकती है। लिंग पंप और क्रीम जैसी सीधे लिंग पर उपयोग की जाने वाली चीजें भी बाजार में उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष

लिंगोत्थान का दोष ज्यादातर बूढ़े लोगों को प्रभावित करता है। इस यौन विकार के लक्षण कम उम्र में भी विकसित हो सकते हैं। इसके कारण न केवल पुरुषों का शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है बल्कि उनमें अवसाद जैसे मनोवैज्ञानिक लक्षण भी पैदा हो सकते हैं।

इस बीमारी के इलाज के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं, ये उपचार या तो सीधे इस समस्या का समाधान करते हैं या फिर उस विशेष स्वास्थ्य समस्या को दूर करते हैं जिसके कारण ये लक्षण पैदा हो रहे होते हैं।

अंतर्निहित समस्या के इलाज द्वारा शुरूआत करने की सिफारिश की जा सकती है। इससे निकट भविष्य में किसी गंभीर समस्या के संभावित विकास से बचने में मदद मिल सकती है।

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